शब्द के साथ उसका संदर्भ लिखें
पढ़ते समय कोई शब्द समझ न आए तो पहले वह वाक्य लिखें जिसमें उसका उपयोग हुआ है। हैंड का अर्थ किसी के पास मौजूद पत्ते या एक दौर हो सकता है। संदर्भ से लेखक का आशय समझने में मदद मिलती है। नोट के साथ स्रोत पेज का नाम रखें, ताकि विवरण दोबारा देखा जा सके।
परिभाषा और उदाहरण अलग रखें
हर प्रविष्टि में छोटी परिभाषा और उसके बाद अलग उदाहरण दें। सूट की परिभाषा चिह्नों का समूह बता सकती है; पान उसका उदाहरण है। केवल एक उदाहरण से पूरी श्रेणी को परिभाषित न करें। जरूरत हो तो अंतर भी लिखें: रंग दिखावट है, जबकि सूट समूह की पहचान है।
संदेह को स्पष्ट रहने दें
अर्थ तय न हो तो अनुमान को तथ्य बनाने के बजाय प्रश्न के रूप में लिखें। यह भी बताएँ कि उसे कैसे जाँचना है, जैसे स्रोत की संकेत-कुंजी देखना। उपयोगी शब्दावली में अनसुलझे प्रश्न हो सकते हैं। उसका उद्देश्य सावधानी से पढ़ने में मदद करना है, हर पंक्ति को पूरा दिखाना नहीं।
अपने शब्दों में समझाकर दोहराएँ
स्रोत दोबारा पढ़ने के बाद उसे बंद करके शब्द का अर्थ नए वाक्य में समझाएँ। मूल अर्थ से तुलना करें और छूटी शर्त सुधारें। उद्धरण और अपनी व्याख्या अलग रखें। नोट साझा करें तो स्रोत लिंक दें और लंबे अनुच्छेद न दोहराएँ। छोटी, सटीक प्रविष्टियों को सुधारना आसान होता है।
सामान्य प्रश्न
क्या हर अनजान शब्द लिखना जरूरी है?
पहले वे शब्द चुनें जो पेज समझने के लिए जरूरी हैं। नियमित रूप से देखी जाने वाली छोटी सूची अधिक उपयोगी हो सकती है।
क्या एक शब्द के दो अर्थ हो सकते हैं?
हाँ। अलग संदर्भों को अलग नाम दें, दोनों अर्थ एक वाक्य में जबरन न मिलाएँ।
क्या हर संक्षिप्त संकेत का अनुवाद करना चाहिए?
जरूरी नहीं। संकेत रखकर उसका अर्थ अपनी भाषा में समझा सकते हैं। संकेत-कुंजी स्पष्ट लिखें।